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Emergency Brake: ट्रेन में इमरजेंसी ब्रेक क्या है, जानें किन हालतों में हो सकता है इसका इस्तेमाल

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North East Express Train Derails,Emergency Brake,Bihar Train Accident: बिहार के बक्सर में रघुनाथपुर स्टेशन पर बुधवार रात को गुवाहाटी के कामाख्या स्टेशन जाने वाली नॉर्थ-ईस्ट एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त हो गई. बताया जा रहा है कि ये ट्रेन आनंद विहार से आ रही थी.

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  • नॉर्थ-ईस्ट एक्सप्रेस रात 9.35 बजे बक्सर जिले के रघुनाथपुर रेलवे स्टेशन के पास डीरेल

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  • जानें अचानक से ब्रेक लगाया जाए तो क्या होगा

North East Express Train Derails,Emergency Brake.Bihar Train Accident: बिहार के बक्सर (Buxar) जिले में बड़ा रेल हादसा हुआ है.दिल्ली के आनंद विहार स्टेशन से गुवाहाटी के कामाख्या स्टेशन जाने वाली नॉर्थ-ईस्ट एक्सप्रेस रात 9.35 बजे बक्सर जिले के रघुनाथपुर रेलवे स्टेशन के पास डीरेल हो गई. कई लोगों की मौत की सूचना भी मिल रही है, हालांकि प्रशासन की तरफ से अब तक छह लोगों के मौत की पुष्टि की गई है. जिला प्रशासन ने इस हादसे में 60 से 70 लोगों के घायल होने की पुष्टि भी की है. रेल मंत्री ने ट्रेन हादसे में जान गंवाने वाले यात्रियों के प्रति संवेदना जताई. उन्होंने कहा, ”अपूरणीय क्षति के लिए गहरी संवेदनाएं. पटरी से उतरने के कारण का पता लगाया जाएगा.”

आपको ये जानने की इच्छा जरूर होगी की ट्रेन में अचानक से ब्रेक लगाया जाए तो क्या होगा. ट्रेन के ब्रेकिंग सिस्टम के बारे में. क्या आप जानते है कि ट्रेन चलाने वाला ड्राइवर यानि लोकोपायलट ट्रेन को अचानक क्यों नहीं रोक पाता है. ट्रेन में आखिर कौन सा ब्रेक होता है. कितने ब्रेक होते हैं. ब्रेक लगाने के बाद ट्रेन कितनी देर में रूकती है. ट्रेन का इमरजेंसी ब्रेक (Emergency Brake) किसे कहते है. आइए जानते है ट्रेन के ब्रेकिंग सिस्टम के बारे में…

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ट्रेन में इमरजेंसी ब्रेक कैसे काम करता है?

जब कभी ट्रेन में पायलट द्वारा इमरजेंसी ब्रेक लगाया जाता है, तो ट्रेन सही सलामत रुक जाती है. लेकिन कई बार ऐसा होता है कि इसी emergency ब्रेक को लगाने से ट्रेन derail भी हो जाती है. बतादें कि ट्रेन का ब्रेकिंग सिस्टम एयर प्रेसर के द्वारा काम करती है. जहां ट्रेन के नीचे पूरे कोच में दो पाइप बिछाई जाती है. जिसे ब्रेक पाइप और फीड पाइप कहा जाता है. इन दोनों पाइपों में लोकमोटिव के अंदर लगे कम्प्रेसर कि सहायता से 5.6 केजी का प्रेसर मैन्टेन किया जाता है. जिससे ब्रेक सिलिन्डर में लगा पिस्टन ब्रेक शुज को खिच कर रखता है और ब्रेक रिलीज रहते है. जब ट्रेन में ब्रेक अप्लाइ करनी होती है तो लोकोपायलट कैबिन से एयर का प्रेसर को कम करते है. ब्रेक पिस्टन ब्रेक शुज को अंदर धकेलता है और शुज पहिये से चिपक जाता है, जिससे ब्रेक लग जाती है.

आइये अब अध्ययन करते हैं कि ट्रेन में कितने प्रकार की ब्रेक होती हैं?

ब्रेक्स को रेलवे ट्रेनों के कोचों पर धीमा, नियंत्रण त्वरण को सक्षम करने या पार्क किए जाने पर खड़े रखने के लिए उपयोग किया जाता है.

जबकि बुनियादी सिद्धांत सड़क वाहन के समान है, लेकिन कई जुड़े हुए रेल के डिब्बों को नियंत्रित करने की आवश्यकता और परिचालन सुविधाएं ट्रेन में अधिक जटिल होती हैं. किसी भी ब्रेकिंग सिस्टम के नियंत्रण में किसी भी वाहन में ब्रेकिंग एक्शन को नियंत्रित करने वाले महत्वपूर्ण कारक दबाव, संपर्क में सतह क्षेत्र, ताप उत्पादन की मात्रा और ब्रेकिंग सामग्री का उपयोग किया जाता है.

उनके सक्रियण की विधि के अनुसार, ब्रेक को चार प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है:

1. वायवीय ब्रेक (Pneumatic Brake)

a) वैक्यूम ब्रेक (Vacuum Brake)

b) संपीडित एयर ब्रेक (Compressed Air Brake)

2. Electropneumatic brakes

3. मैकेनिकल ब्रेक (Mechanical Brake)

4. विद्युत चुम्बकीय ब्रेक (Electromagnetic Brake)

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क्या आप जानते हैं कि ट्रेन के ड्राईवर (लोकोपायलट) को ब्रेक लगाना कब जरुरी होता है?

ट्रेन को किस समय चलना है और कब रुकना है, ये लोकोपायलट सिग्नल और गार्ड के हिसाब से तय करता है. रेलवे में तीन सिग्नल होते हैं: हरा, पीला और लाल. हरे सिग्नल का मतलब है ट्रेन का अपनी स्पीड पर चलना, पीला सिग्नल मिलने पर लोकोपायलट ट्रेन की स्पीड को धीमी करना शुरू करता है, इसके लिए वह दो ब्रेक का इस्तेमाल करता है, एक इंजन के लिए और दूसरा पूरी ट्रेन के लिए. जैसा की ऊपर हम देख चुके है कि ट्रेन के हर डिब्बे और पहिये पर ब्रेक होता है और ये सभी ब्रेक पाइप से जुड़े होते हैं. लाल सिग्नल मिलने पर उसको ट्रेन को रोकना होता है. हम आपको बता दें कि ट्रेन को रफ्तार से चलाना, 150 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से चलाना आसान होता है लेकिन ब्रेक लगाना काफी मुश्किल.

क्या आप जानते हैं कि ट्रेन के ड्राईवर (लोकोपायलट) को ब्रेक लगाना कब जरुरी होता है?

ट्रेन को किस समय चलना है और कब रुकना है, ये लोकोपायलट सिग्नल और गार्ड के हिसाब से तय करता है. रेलवे में तीन सिग्नल होते हैं: हरा, पीला और लाल. हरे सिग्नल का मतलब है ट्रेन का अपनी स्पीड पर चलना, पीला सिग्नल मिलने पर लोकोपायलट ट्रेन की स्पीड को धीमी करना शुरू करता है, इसके लिए वह दो ब्रेक का इस्तेमाल करता है, एक इंजन के लिए और दूसरा पूरी ट्रेन के लिए. जैसा की ऊपर हम देख चुके है कि ट्रेन के हर डिब्बे और पहिये पर ब्रेक होता है और ये सभी ब्रेक पाइप से जुड़े होते हैं. लाल सिग्नल मिलने पर उसको ट्रेन को रोकना होता है. हम आपको बता दें कि ट्रेन को रफ्तार से चलाना, 150 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से चलाना आसान होता है लेकिन ब्रेक लगाना काफी मुश्किल.

इमरजेंसी ब्रेक ट्रेन में कहां होता है और कब लगाया जाता है?

इमरजेंसी मतलब आपात स्थिति. लोकोपायलट तब इमरजेंसी ब्रेक लगाता है जब अचानक से कोई जानवर या कोई व्यक्ति सामने आ जाए, पटरी में कुछ खराबी दिखे इत्यादि. ये ब्रेक लोकोपायलट के बगल में ही होता है और उसी लीवर से लगता है जिससे सामान्य ब्रेक. लीवर को अधिक समय के लिए खीचने पर इमरजेंसी ब्रेक लग जाता है. अब सवाल उठता है कि इमरजेंसी ब्रेक के लगाने पर कितनी देर में ट्रेन रूकती है.

अगर ट्रेन 150 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से चल रही हो और ऐसे में लोकोपायलट को इमरजेंसी ब्रेक लगाना पड़े तो ब्रेक के लगते ही, ब्रेक पाइप का प्रेशर पूरी तरह से खत्म हो जाएगा और गाड़ी के हर पहिये पर लगा ब्रेक शू पूरी ताकत के साथ रगड़ खाने लगेगा. तब पर भी ट्रेन लगभग 1200 से 1500 मीटर तक चलने के बाद रुक पाएगी. मालगाड़ी में इमरजेंसी ब्रेक लगाने पर गाड़ी लगभग 1100 से 1200 मीटर जाकर रूकती है ये निर्भर करता है कि उसमें कितना माल है और डेमू (DEMU) गाड़ी को रोकने के लिए 625 मीटर की दूरी तय करनी पड़ती है. DEMU का अर्थ है डीजल (D), इंजन (E), मल्टिपल (M) और यूनिट (U). इस तरह की ट्रेन में अलग से इंजन नहीं होता है. ट्रेन के पहले और आखिरी डिब्बे में दो छोटे-छोटे इंजन लगे होते हैं. ये लोकल ट्रेन होती है और दो शहरों के बीच कम रूट पर चलती है. इनकी रफ्तार लगभग 100 किलोमीटर प्रतिघंटा तक होती है.

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