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प्रभात खबर ग्राउंड रिपोर्ट : न बिजली-पानी और न चलने लायक सड़क, आदिवासी बहुल लोदापाठ गांव की कहानी

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बिशुनपुर : न बिजली है. न पीने का शुद्ध पानी. न ही चलने लायक सड़क है. रोजगार का कोई ठिकाना नहीं. आज भी यहां के लोग गरीबी, बेकारी और तंगहाली में जी रहे हैं. यह कहानी बिशुनपुर प्रखंड के अमतीपानी पंचायत के नीचे लोदापाठ गांव की है. गांव की क्या स्थिति है. पढ़ें, बिशुनपुर से बसंत कुमार की रिपोर्ट...

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बिशुनपुर : न बिजली है. न पीने का शुद्ध पानी. न ही चलने लायक सड़क है. रोजगार का कोई ठिकाना नहीं. आज भी यहां के लोग गरीबी, बेकारी और तंगहाली में जी रहे हैं. यह कहानी बिशुनपुर प्रखंड के अमतीपानी पंचायत के नीचे लोदापाठ गांव की है. गांव की क्या स्थिति है. पढ़ें, बिशुनपुर से बसंत कुमार की रिपोर्ट…

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लोदापाठ गांव की समस्या शासन और प्रशासन के वादों को झुठलाने के लिए काफी है. आजादी के 72 वर्ष बीत गये. इसके बाद भी ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं से महरूम हैं. गांव में आदिम जनजाति और आदिवासी के 55 परिवार रहते हैं. जिसकी आबादी 250 है. आजादी के 72 वर्ष बाद भी 250 ग्रामीण ढिबरी की रोशनी में रहने को विवश हैं.

गांव तक बिजली नहीं पहुंची है. सरकार विकास के नाम पर लाख अपनी पीठ थपथपा ले, परंतु इस गांव की हकीकत सिस्टम की पोल खोल रही है. गांव में शुद्ध पीने का पानी नहीं है. ग्रामीण कुआं और दाड़ी का पानी पीते हैं. गर्मी में कुआं और दाड़ी सूख जाता है तो गांव से बहने वाली नदी का पझरा पानी ग्रामीण पीते हैं.

ग्रामीणों ने सुनायी पीड़ा

गांव के मैनेजर भगत, शोभा असुर, मैनू असुर ने समस्या से अवगत कराते हुए कहा कि हमारे गांव में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं है. हम आज भी नदी के किनारे चुआं खोदकर या फिर दाड़ी से पानी पीकर अपनी प्यास बुझाते हैं. परंतु बरसात आते ही, हम लोगों के समक्ष पीने के पानी की गंभीर समस्या उत्पन्न हो जाती है. गांव के रंजनी देवी, रूपा देवी, शांति देवी, सुंदरी देवी, सावित्री देवी आदि महिलाओं ने कहा कि पहाड़ से नीचे समंदरी गांव में सात माह पूर्व बिजली के लिए पोल व तार लगाया गया था. परंतु आज तक घरों में बिजली का कनेक्शन नहीं किया गया है. उन्होंने कहा कि बिजली की तार जब गांव तक पहुंच रही थी, तो गांव के सारे बच्चे व ग्रामीण खुश थे कि अब बिजली की लाइट में पढ़ाई कर सकेंगे़. साथ ही बिजली उपकरण का लाभ ले सकेंगे.

जूनियर इंजीनियर ने कहा

बिजली विभाग के जेई सूरज कुमार दास से पूछने पर गांव तक बिजली के तार नहीं पहुंचे हैं, उन्होंने जानकारी होने की बात से इंकार कर दिया. उन्हें जानकारी दी गयी है कि गांव तक तार पहुंच चुका हैं. सिर्फ कनेक्शन बाकी है. आप गांव में कनेक्शन करा दें. ताकि आदिम जनजाति व आदिवासी परिवार के लोगों को बिजली की रोशनी मिल सके. उनके छोटे बच्चे बिजली की रोशनी में पढ़ सकें. परंतु विभाग के जेई द्वारा अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है.

बिजली पहुंचाने में मदद करें

नीचे लोदापाठ के ग्रामीणों ने बिजली विभाग के एसडीओ से गुहार लगाया है कि गांव तक बिजली का तार पहुंचाने में मदद करें. गांव में बिजली का कनेक्शन बाकी है. एसडीओ साहेब आप विभाग के कर्मियों को दिशा निर्देशित कर दें. ताकि हम गांव वालों को खुशी मिल सके. हमारे बच्चे बिजली की रोशनी में पढ़ सकें. बच्चे अब बिजली की रोशनी में पढ़ना चाहते हैं.

Posted By: Amlesh Nandan Sinha

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