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इसीएल प्रभावित लोहंडिया बाजार के ग्रामीणों ने बिजली की मांग को लेकर जल सत्याग्रह

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अनूठा सत्याग्रह. हाथ में तिरंगा लेकर तालाब में खड़े हो गये दर्जनों ग्रामीण,

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अपनी मांगों को लेकर अहिंसात्मक आंदोलन का अनोखा तरीका गुरुवार को देखने को मिला. आंदोलन को जल सत्याग्रह के माध्यम से मांगों को रखा गया. राजमहल कोल परियोजना क्षेत्र के प्रभावित गांव लोहंडिया बाजार के लोगों ने बिजली की अनवरत सप्लाई की मांग को लेकर जल सत्याग्रह किया. ईसीएल प्रभावित गांव लोहंडिया बाजार के सैकड़ों ग्रामीणों ने हाथ में तिरंगा लेकर स्थानीय शिव मंदिर तालाब में एक साथ प्रवेश किया. इस दौरान तालाब में प्रवेश कर जल सत्याग्रह करते हुए ग्रामीणों ने परियोजना के विरुद्ध जोरदार प्रदर्शन किया. अनोखे अंदाज में किये जा रहे प्रदर्शन के क्रम में परियोजना प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गयी. वहीं गांव के साथ सौतेला व्यवहार करने का आरोप भी ग्रामीणों ने लगाया. आसपास के दर्जनों गांव में प्रबंधन की ओर से बिजली की सप्लाई की गयी है, मगर लोहंडिया गांव के लोगों को प्रबंधन की ओर से बिजली नहीं दी जा रही है. बताया कि यह बात बर्दाश्त करने योग्य नहीं है. कहा कि ग्रामीण एकजुट हैं. सभी अपने सिर पर कफन बांधकर आंदोलन करने को लेकर प्रतिबद्ध हैं.

27 जून को भी ढोल-नगाड़े के साथ घोड़े पर सवार होकर दिया था ज्ञापन :

बताया कि 27 जून को एरिया कार्यालय में घोड़े पर सवार होकर तथा ढोल नगाड़े के साथ इसीएल प्रबंधन को बिजली की मांग को लेकर ज्ञापन दिया गया था. ज्ञापन में 14 दिनों के अंदर ग्रामीणों को बिजली देने का उल्लेख था. एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी प्रबंधन की ओर से कोई पहल नहीं की गयी है. बताया कि 14 दिन पूरा होने पर परियोजना में कोयला खनन कार्य को बंद किया जायेगा. इसकी सारी जिम्मेवारी प्रबंधन की होगी. ग्रामीण ने बताया कि गांव के समीप 200 फीट गहरी खाई कर कोयला निकाला जा रहा है. ग्रामीण हैवी ब्लास्टिंग व कोयले के धूलकण के शिकार हो रहे हैं, लेकिन प्रबंधन ग्रामीणों की सुविधा पर ध्यान नहीं दे रही है. जिला परिषद सदस्य प्रतिनिधि सुजीत कुमार साह ने कहा कि 15 वर्षों से परियोजना प्रबंधन के उपेक्षा के शिकार हो रहे हैं. ग्रामीणों ने कई बार आंदोलन किया, लेकिन प्रबंधन ग्रामीण के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है. गांव में प्रबंधन को हरहाल में बिजली पानी देना ही होगा. पंसस विवेकानंद भगत ने बताया कि गांव से सटे इसीएल कोयला खनन का कार्य करती है. करोड़ों का मुनाफा कमा रही है. ग्रामीणों को मूलभूत सुविधा नहीं देती है. ग्रामीण प्रबंधन से कई बार बिजली देने की मांग की, लेकिन प्रबंधन ने कोई भी सकारात्मक पहल नहीं किया. उप मुखिया संतोष ठाकुर ने परियोजना प्रबंधन को ग्रामीणों को मूलभूत सुविधा देना होगा. गांव के बगल में खनन कार्य होने से ग्रामीण अत्यधिक प्रभावित है. पानी का भी संकट है. हैवी ब्लास्टिंग के कारण कई घर क्षतिग्रस्त है, इस पर परियोजना ध्यान दें.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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