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देवघर में खुलेआम हो रहा है खून का कारोबार, थैलेसीमिया मरीज को बचाने के नाम पर 2500 रुपये का किया सौदा

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झारखंड के देवघर में खून के कारोबार खुलेआम हो रहा है, थैलेसीमिया मरीज के को बचाने के नाम पर कुछ लोग खून का सौदा करते हैं. जिले के पुराना सदर अस्पताल के बाहर ऐसे ही मामला देखने को मिला है

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देवघर: देवघर में खून के कारोबार का खुलासा हुआ है. थैलेसीमिया मरीज की जिंदगी बचाने के लिए भी कुछ लोग उनसे खून का सौदा करते हैं. देवघर में रविवार को एक ऐसा ही मामला सामने आया, जिसने शहर के लोग के होश उड़ा दिये. बिहार के बांका जिले के बेलहर के बसमता निवासी वीरेंद्र यादव की 17 माह की पुत्री शिवानी कुमारी को खून चढ़ाने के लिए एक व्यक्ति ने 2500 रुपये का सौदा किया.

पुराना सदर अस्पताल के गेट के पास परिजनों से 2500 रुपये लेकर खून दिये. परिजन बड़ी उम्मीद के साथ शिवानी को खून चढ़ाने सदर अस्पताल लेकर गये. पर खून के थैले पर कुछ नहीं लिखा था. इस पर न ब्लड ग्रुप अंकित था. न ही सीरियल नंबर. ब्लड बैंक का मुहर भी नहीं लगा था. परिजनों के पास ब्लड से संबंधित कोई कागजात भी नहीं थे. संदेह होने के बाद एएनएम ने रविवार सुबह इसकी जानकारी डॉ डी पासवान को दी.

मौके पर पहुंचे डॉक्टर ने बताया कि थैले पर खून का कलेक्शन और एक्पायरी डेट भी नहीं है. ऐसे में इस खून काे चढ़ाया नहीं जा सकता है. खून खराब है. इसके बाद मामला सामने आया. इस बीच मामले का खुलासा होने के बाद रेडक्रॉस सोसाइटी के वाइस चेयरमैन पीयूष जायसवाल व मयंक राय अस्पताल पहुंचे. परिजन को लेकर मामले की शिकायत देने नगर थाना पहुंचे.

थैलेसीमिया पीड़ित बच्ची के मामा दिनेश यादव से पैसे लेकर रक्त मुहैया कराने समेत ठगी व धोखाधड़ी के मामले में मोबाइल नंबर 7645086206 के धारक पर मामला दर्ज कराया है. घटना के बाद मामले की जांच में नगर पुलिस सदर अस्पताल पहुंची. इस दौरान अॉन ड्यूटी चिकित्सक ने रक्त को इंसानी बताया, मगर रक्त के पैकेट पर बैच नंबर व ब्लड ग्रुप का जिक्र नहीं होने से संदेह जताया. मामले में सीएस ने भी थाना प्रभारी को जांच का निर्देश दिया है.

पुलिस ने मामला दर्ज कर मोबाइल धारक की तलाश शुरू कर दी है. इस संबंध में नगर थाना प्रभारी रतन कुमार िसंह ने बताया कि गलत तरीके से खून की खरीद-बिक्री कर जरूरतमंद को ठगी का शिकार बनाने के मामले में प्राथमिकी दर्ज कर मोबाइल नंबर धारक के खिलाफ छानबीन शुरू कर दी गयी है. साथ ही खून की सत्यता की जांच के लिए उसे एफएसएल भेजा जायेगा.

बोला ब्लड बैंक : हमारा कोई लेना-देना नहीं

ब्लड बैंक प्रभारी डॉ दीपक कुमार ने बताया कि खून की खरीद-बिक्री में ब्लड बैंक का कोई लेना-देना नहीं है. बाहर में किसी ने मरीज के परिजनों को ठग लिया है. ब्लड बैंक से खून मुफ्त में देने का प्रावधान है. डॉक्टर का रिक्वायरमेंट स्लिप होना चाहिए. ब्लड बैंक से मिलने वाले खून की थैली में मुहर के साथ सभी जानकारी रहती है. खून देने व लेने वाले का पूरा डिटेल रजिस्टर में लिखा जाता है.

ब्लड बैंक से खरीद-बिक्री का मामला नहीं है. फिर भी इसकी जांच करायी जायेगी. यदि किसी कर्मी की मिलीभगत हुई, तो कार्रवाई की जायेगी. यदि बाहर का है, तो जिला प्रशासन को कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए.

तीन मार्च को भी परिजन खरीदे थे खून

दिनेश ने बताया कि ब्लड बैंक द्वारा डॉक्टर से साइन कराने की बात कहे जाने के बाद उन्होंने एक व्यक्ति से संपर्क किया. तीन मार्च को भी खून खरीदा था. उस व्यक्ति ने ब्लड बैंक के बाहर पुराना अस्पताल गेट पर रहने को कहा. शनिवार शाम करीब साढ़े सात बजे वह आया और एक यूनिट ब्लड के लिए तीन हजार की मांग करने लगा. इसके बाद 2500 रुपये पर बात बन गयी.

पैसे देने के कुछ देर बाद वह अस्पताल गेट पर ही खून देकर चला गया. बाद में एएनएम की ओर कागज मांगे जाने के बाद दिनेश ने फिर उस व्यक्ति को फोन किया. खून के कागजात मांगे. उसने बताया कि खून ब्लैक में दिया गया है. इसका कागज नहीं मिलेगा. इसके बाद उसने अपना मोबाइल बंद कर दिया. तीन मार्च को भी वे लोग बच्ची को खून चढ़ाने के लिए आये थे. इस दौरान बच्ची के पिता वीरेंद्र यादव से इसी व्यक्ति ने तीन हजार रुपये लेकर ब्लड उपलब्ध कराया था. साथ ही मोबाइल नंबर देते हुए कहा था कि जब भी खून की जरूरत पड़े, तो फोन कर देना.

उठ रहे सवाल

परिजन का दावा, तीन मार्च को भी उसी व्यक्ति से खून खरीद कर बच्ची को चढ़ाया गया था. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि उस समय बच्ची को खून कैसे चढ़ा दिया गया. उस समय खून के थैले पर सारी जानकारियां लिखी हुई थी ? ब्लड बैंक का मुहर लगा हुआ था?. अगर ऐसा था, जो जांच का विषय है, वह व्यक्ति खून कहां से लेकर आया था. अगर जानकारियां नहीं लिखी हुई थी, तो बच्ची को खून कैसे चढ़ा दिया गया. दोनों ही परिस्थिति पर सवाल उठ रहे हैं.

Posted By: Sameer Oraon

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