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राष्ट्रपति से लेकर राज्यपाल और मानवाधिकार आयोग ने चितकोहरा शरणार्थी शिविर की अर्जित भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने और दखल दिलाने का आदेश राज्य सरकार को दिया

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अजीत कुमार

शहीद भगत सिंह की जयंती की पूर्व संध्या पर बुधवार को सिख शरणार्थियों ने पदयात्रा निकाली. इसमें सैकड़ों महिलाएं और पुरुष शामिल हुए. शरणार्थियों का कहना था कि तत्कालीन राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद के आदेश के बावजूद राज्य सरकार ने अब तक चितकोहरा स्थित सैकड़ों पंजाबी शरणार्थियों को अर्जित जमीन उपलब्ध नहीं करा सकी है. गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा (गोबिंद नगर, चितकोहरा) के उपाध्यक्ष सरदार हीरा सिंह बग्गा ने बताया कि राष्ट्रपति से लेकर राज्यपाल और मानवाधिकार आयोग ने चितकोहरा शरणार्थी शिविर की अर्जित भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने और दखल दिलाने का आदेश राज्य सरकार को दिया लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है.

उन्होंने बताया कि तत्कालीन राष्ट्रपति डाॅ राजेंद्र प्रसाद के आदेश पर पश्चिमी पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के गुजरवाला समेत अन्य जगहों से आये तीन सौ परिवारों के लिए राज्य सरकार ने चौदह बीघा और चौदह कट्ठा से अधिक जमीन चितकोहरा में वहां के जमींदार अजीजउद्दीन अशरफ एवं अन्य भूपतियों से अर्जित की थी, जो बिहार सरकार के गजट (21 सितंबर, 1949) में बतौर रिकार्ड दर्ज है. इसमें दावेदार पंजाबी शरणार्थियों के लिए 4.86 एकड़ जमीन भी गजट में शामिल है. लेकिन पटना जिला प्रशासन के दस्तावेज में मात्र 4.47 एकड़ जमीन ही दर्ज है. इसके तहत शरणार्थियों के लिए 2.47 एकड़ जमीन पर 139 क्वार्टर बनवाये गये और एक सौ परिवारों को बसाया गया. शेष बची दो एकड़ जमीन पर जिला प्रशासन के अधिकारियों की मिलीभगत से अतिक्रमणकारियों ने कब्जा जमा लिया.

उन्होंने बताया कि इस जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराने व दखल दिलाने के लिए राष्ट्रपति सचिवालय ने आठ जून, 2003 को पटना के डीएम को आदेश दिया. फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई. इससे पूर्व वर्ष 1979 में यह मामला बिहार विधानमंडल में आया और फिर दोनों सदनों ने अतिक्रमण हटाने और उस पर दखल दिलाने को आदेश राज्य सरकार को दिया, लेकिन उसे भी. ठंडे बस्ते में डाल दिया गया. वर्ष 1984-85 में पुनर्वास विभाग के आयुक्त बीके सिंह ने भी डीएम को इस तरह का आदेश दिया था.

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