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पटना : विधानसभा चुनाव आते ही नेता पुत्रों की सक्रियता बढ़ गयी है. दरअसल विधानसभा चुनाव की सरगर्मी शुरू होते ही राजनेताओं की नयी पीढ़ी भी सक्रिय हो गयी है. व्यस्त जीवन शैली, ऊंची डिग्री और बड़ी नौकरियों को छोड़ नेता पुत्र समाजसेवा को आगे आ रहे हैं.

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पटना : विधानसभा चुनाव आते ही नेता पुत्रों की सक्रियता बढ़ गयी है. दरअसल विधानसभा चुनाव की सरगर्मी शुरू होते ही राजनेताओं की नयी पीढ़ी भी सक्रिय हो गयी है. व्यस्त जीवन शैली, ऊंची डिग्री और बड़ी नौकरियों को छोड़ नेता पुत्र समाजसेवा को आगे आ रहे हैं. लोकतंत्र के लिए तो यह ठीक है , पर उनकी सक्रियता से वर्षों से जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे कार्यकर्ताओं की दिलों की धड़कनें तेज हो गयी हैं. अभी से उन्हें टिकट कटने या नहीं मिलने का भय सताने लगा है. यह कोई पहली बार नहीं हो रहा या किसी एक दल की स्थिति नहीं है. कमोवेश अधिकतर दलों की एक जैसी हालत है. इस मामले में बेहतर स्थिति में जदयू है, जहां अभी भी नेता पुत्रों या रिश्तेदारों की इंट्री के इक्के- दुक्के ही मामले आये हैं. 2010 के विधानसभा चुनावों में तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने दल के नेताओं के रिश्तेदारों को मना ही कर दिया था. इस बार के चुनाव में दूसरे दलों की तुलना में यहां ऐसे मामले नहीं के बराबर हैं. सांसद बशिष्ठ नारायण सिंह और मंत्री केएन वर्मा के बेटे की चुनाव लड़ने की चाहत रखने वालों में नाम हैं.

हर चुनाव में उतरते रहे हैं नेता पुत्र

2015 के विधानसभा चुनाव में भी नेता पुत्र उम्मीदवार बने थे. इनमें से लालू-राबड़ी के बेटे तेज व तेजस्वी, शिवानंद तिवारी के बेटे राहुल तिवारी अौर सिक्किम के राज्यपाल गंगा प्रसाद के बेटे संजीव चौरसिया ही चुनाव जीत पाये. बाकी के सारे उम्मीदवार पराजित हो गये. जिन नेता पुत्रों की हार हुई थी उनमें अश्विनी कुमार चौबे के पुत्र अर्जित शाश्वत, डा सीपी ठाकुर के पुत्र विवेक ठाकुर जो अब सांसद हैं, पूर्व सीएम जीतन राम मांझी के पुत्र डा संतोष कुमार सुमन जो अब एमएलसी हैं, हुकुमदेव नारायणद के बेटे अशोक यादव, पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह के बेटे सुमित कुमार और अजय प्रताप के नाम प्रमुख हैं.

सभी दलों में एक समान स्थिति

इनमें कोई एक दल नहीं बल्कि, वाम दलों को छोड़ करीब सभी प्रमुख पार्टियों की यही स्थिति है. राजद में लालू-राबड़ी के दोनों पुत्र तेज प्रताप व तेजस्वी यादव इस बार भी मैदान में होंगे. वहीं, भाजपा में जहां अश्विनी चौबे के बेटे अर्जित शाश्वत भागलपुर से इस बार भी उम्मीदवार होना चाहते हैं. सासाराम के भाजपा सांसद छेदी पासवान के बेटे रवि पासवान की भी इच्छा इस बार के चुनाव मैदान में उतरने की है. राजद में ही पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह की पुत्री मधु सिंह बाढ़ विधानसभा क्षेत्र से मैदान में उतरेंगी. राजद प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह के बेटे सुधाकर सिंह रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवारी जता रहे हैं. लोजपा में कुछ सांसद अपने पुत्र व पुत्रियों को उम्मीदवार बनाना चाहते हैं. पूर्व सांसद रामचंद्र पासवान के छोटे बेटे भी कल्याणपुर क्षेत्र से विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बनने की तैयारी कर रहे हैं.

राजद में भी हैं कई नेताओं के पुत्र लाइन में

राजद विधायक अरुण यादव की पत्नी के इस बार विधानसभा चुनाव लड़ने की संभावना है. शिवानंद तिवारी के बेटे राहुल तिवारी मौजूदा विधायक हैं. उनके इस बार भी उम्मीदवार बनना तय है. जदयू की पूर्व सांसद मीना सिंह के बेटे, राजद से जदयू में आये राधाचरण सेठ के बेटे कन्हैया प्रसाद, पूर्व केंद्रीय मंत्री कांति सिंह के बेटे प्रिंस कुमार, पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह के बेटे सुमित कुमार और अजय कुमार के भी इस बार चुनाव लड़ने की संभावना है. पूर्व सांसद सूरजभान के छोटे भाई के भी उम्मीदवार होने का कयास लग रहा है.

कांग्रेस में नेता पुत्रों की है बड़ी जमात

कांग्रेस के भीतर नेता पुत्रों की एक बड़ी जमात टिकट पाने की जुगत में है. इनमें प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा के बेटे माधव झा बेनीपुर से, डाॅ अशोक कुमार के बेटे कुमार अतिरिक रोसड़ा से, पूर्व विधायक रामदेव राय के बेटे शिवप्रकाश गरीबदास बछवारा से, विधानमंडल दल के नेता सदानंद सिंह के बेटे शुभानंद कहलगांव से तैयारी में जुटे हैं.

posted by ashish jha

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