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बिहार के इस जिले से जब एक सीट पर दो विधायक चुनकर भेजे जाते थे विधानसभा, जानिए क्या है पूरी कहानी…

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बांका: सूबे में विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट शुरू हो गयी है. संभावना है कि तय समय पर चुनाव हो सकते हैं. बहरहाल, विधानसभा का इतिहास भी जिले में रोचक रहा है. यहां कभी एक विधानसभा से दो-दो एमएलए चुने जाते थे.

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बांका: सूबे में विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट शुरू हो गयी है. संभावना है कि तय समय पर चुनाव हो सकते हैं. बहरहाल, विधानसभा का इतिहास भी जिले में रोचक रहा है. यहां कभी एक विधानसभा से दो-दो एमएलए चुने जाते थे. हैरान मत होइये. सच में ऐसी व्यवस्थाएं थीं. 1951 और 1957 के विधानसभा चुनाव में दो-दो एमएलए की परंपरा का निर्वहन किया गया था. ये बात अलग है कि इतिहास के पन्नों में यह घटना प्रमुखता से दर्ज नहीं है. जानकारी के मुताबिक कटोरिया व अमरपुर से दो-दो विधायक चुने जाते थे.

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 दो सीटों की कहानी

खास बात यह थी कि एक एमएलए सामान्य सीट और दूसरा अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से आता था. कटोरिया में एक सामान्य तो दूसरा अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित था. जबकि अमरपुर में एक सामान्य वर्ग, दूसरा अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित था. हालांकि, 1962 विधानसभा चुनाव से ही दो विधायकों की व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया. इसी चुनाव से एक विधानसभा में एक विधायक निर्वाचित होने लगे.

बांका जिले में थे तीन विधानसभा क्षेत्र

संविधान गठन के बाद हुए चुनाव के दौरान चुनावी क्षेत्र काफी बड़ा हुआ करता था. उस समय कटोरिया में ही बेलहर विधानसभा क्षेत्र आता था. यानी कटोरिया के अंतर्गत बेलहर, चांदन, बौंसी के अलावा शंभुगंज का कुछ हिस्सा आता था. जबकि अमरपुर के अंदर अमरपुर, धोरैया, रजौन, फुल्लीडुमर के साथ शंभुगंज का शेष हिस्सा हुआ करता था. हालांकि, 1957 में ही धोरैया विधानसभा अलग होने की जानकारी मिलती है. जबकि बांका में बांका और बाराहाट प्रखंड का क्षेत्र हुआ करता था.

कौन-कौन थे विधायक

बांका विधानसभा सीट सिंगल मेंबर का था. यानी यहां एक ही विधायक चुने जाते थे. जबकि अन्य की व्यवस्थाएं अलग थी. जानकारी के मुताबिक कटोरिया से 1951 में सामान्य सीट पर शीतल प्रसाद भगत व अनुसूचित जनजाति से पैरू मांझी निर्वाचित हुए. जबकि कटोरिया से ही 1957 के चुनाव में सामान्य सीट से राघवेंद्र नारायण सिंह और एसटी से पैरू मांझी निर्वाचित हुए . 1951 के चुनाव में अमरपुर से सामान्य सीट पर पशुपति सिंह और अनुसूचित जाति सीट पर भोला दास निर्वाचित हुए. हालांकि, भोला दास का नाम इतिहास के पन्नों में खो सा गया है. वहीं 1957 के चुनाव में अमरपुर से शीतल प्रसाद भगत सामान्य वर्ग से निर्वाचित हुए. दूसरे चुनाव में राघवेंद्र सिंह बांका से कटोरिया भेज दिये गये और शीतल प्रसाद भगत कटोरिया से अमरपुर बुला लिये गये.

1962 के बाद व्यवस्था बदली

हालांकि 1962 के बाद व्यवस्था बदल गयी. इसके अलावा विधानसभा की संख्या में तीन से बढ़कर पांच हो गयी. यद्यपि धोरैया विधानसभा का निर्माण 1957 में ही हो जाने की बात बतायी जाती है. मौजूदा समय में बांका, धोरैया, अमरपुर, कटोरिया व बेलहर विधानसभा क्षेत्र हैं. कटोरिया अनुसूचित जनजाति व धोरैया अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व हो गया.

Posted by : Thakur Shaktilochan Shandilya

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