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भारी पड़ती लापरवाही

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पांच राज्यों के अनुभव इंगित कर रहे हैं कि हम अब भी महामारी की चपेट में हैं. वायरस के नये रूपों के साथ स्थिति भयावह हो सकती है.

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बीते दो सप्ताह से पांच राज्यों- महाराष्ट्र, केरल, छत्तीसगढ़, पंजाब एवं मध्य प्रदेश- में संक्रमित लोगों की संख्या में हो रही बढ़ोतरी बेहद चिंताजनक है. इन राज्यों में संक्रमण रोकने के लिए त्वरित प्रयास जारी हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ समय से क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर संक्रमण के नये मामलों की संख्या में बड़ी गिरावट होने की वजह से लोगों के मास्क पहनने, समुचित दूरी बरतने तथा सैनिटाइजर का इस्तेमाल करने जैसे जरूरी उपायों को लेकर लापरवाह होने के कारण यह स्थिति पैदा हुई है.

सितंबर 2020 में संक्रमित हुए लोगों की संख्या जहां एक लाख के आसपास थी, वह जनवरी 2021 में नौ हजार के लगभग रह गयी थी. नवंबर में संक्रमण में उछाल आया था. जानकारों ने भारत की बड़ी आबादी को देखते हुए इस उपलब्धि को चमत्कार की संज्ञा दी है. ऐसा तब हुआ है, जब अनेक विकसित देश अभी भी संक्रमण पर नियंत्रण नहीं कर सके हैं. आज भी देश के अधिकतर राज्यों से लगातार उत्साहवर्धक खबरें आ रही हैं.

लेकिन इन पांच राज्यों में वायरस के बढ़ते कहर की वजह से सभी को सतर्क होने की आवश्यकता है. न केवल इन राज्यों में, बल्कि कई क्षेत्रों में लोग बचाव को लेकर पहले की तरह गंभीर नहीं हैं. ऐसा तब हो रहा है, जब सरकार, चिकित्सकों व वैज्ञानिकों की ओर से लगातार कहा जाता रहा है कि वायरस का खतरा अभी टला नहीं है और व्यापक टीकाकरण के बाद ही निश्चिंत हुआ जा सकता है.

टीकाकरण के पहले चरण में चिकित्साकर्मियों और अग्रिम मोर्चे पर काम कर रहे लोगों को वैक्सीन देने की प्रक्रिया चल रही है. केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पंजाब और छत्तीसगढ़ को टीकाकरण तेज करने का निर्देश दिया है. हालांकि टीका देने का कार्यक्रम संतोषजनक गति से चल रहा है, लेकिन इसे तेज किया जाना चाहिए.

इसके लिए टीका बनानेवाली कंपनियों और सरकारों को मुस्तैद होना होगा. दुर्भाग्यवश टीके को लेकर बेबुनियाद आशंकाओं और राजनीतिक बयानबाजियों से भी प्रक्रिया को कुछ नुकसान हुआ है. लोगों में लगातार इस जागरूकता का प्रसार होना चाहिए कि टीका पूरी तरह सुरक्षित और कारगर है. कोरोना वायरस को लेकर हमें इसलिए भी सचेत होना है कि यह अपने रूप में बदलाव कर रहा है. दूसरे देशों में कोरोना वायरस के अलग-अलग रूपों के बाद हमारे देश में भी दो नये रूप मिले हैं.

दुनियाभर में अब तक 240 नये रूपों का पता चल चुका है. यह राहत की बात है कि पांच राज्यों में बढ़ते संक्रमण से इन नये विषाणुओं का कोई संबंध नहीं है. चिकित्सा विशेषज्ञों की राय है कि बचाव के उपायों के साथ टीकाकरण अभियान को तेज किया जाना चाहिए. पांच राज्यों के अनुभव इंगित कर रहे हैं कि हम अब भी महामारी की चपेट में हैं. वायरस के नये रूपों के साथ स्थिति भयावह हो सकती है. ऐसे में मामूली लापरवाही भी हम सभी के लिए खतरा पैदा कर सकती है.

Posted By : Sameer Oraon

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