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सूखे से जूझ रहे किसानों की समस्याओं को लेकर आंदोलन करेगी माकपा

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नयी दिल्ली : माकपा देश के अधिकांश इलाकों में सूखे की स्थिति से निपटने के लिए देशव्यापी आंदोलन कर सरकार पर माकूल दबाव बनायेगी. माकपा की केंद्रीय समिति ने शनिवार को इस आशय का प्रस्ताव पारित कर पार्टी की सभी प्रदेश इकाईयों से सूखा प्रभावित इलाकों में किसान संगठनों को एकजुट कर जनआंदोलन करने को कहा है, जिससे सरकार पर सूखे से निपटने के उपाय एवं राहत कार्य शुरू करने का दबाव बनाया जा सके.

इसे भी देखें : किसान आंदोलन : कृषि संकट और बेचैनी का गुबार

माकपा महासचिव सीताराम येचुरी की अध्यक्षता में पार्टी की केंद्रीय समिति की तीन दिवसीय बैठक के दौरान पारित प्रस्ताव में देश के अधिकांश इलाके सूखे की चपेट में होने पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा गया है कि पिछले 65 साल में मॉनसून से पहले की अवधि में इस साल सूखे की सबसे भयावह स्थिति उत्पन्न हुई है. केंद्रीय समिति ने प्रस्ताव में कहा कि गुजरात, बिहार, कर्नाटक, झारखंड, और आंध्र प्रदेश सहित तमाम अन्य राज्यों में जलसंकट भी गहरा गया है. इसकी वजह से केन्द्र सरकार को इन राज्यों में सूखे से निपटने के लिये एहतियाती उपाय एवं परामर्श जारी करने पड़े हैं.

माकपा ने गंभीर स्थिति के बावजूद भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार द्वारा सूखा प्रभावित राज्यों को पर्याप्त राहत सहायता देने में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है. लोकसभा चुनाव के परिणाम की राज्यवार समीक्षा के लिए सात से नौ जून तक माकपा की केंद्रीय समिति की बैठक आयोजित की गयी है. पार्टी पोलित ब्यूरो और प्रदेश इकाइयों के पदाधिकारियों की मौजूदगी वाली समिति की बैठक के दूसरे दिन शनिवार को देश में सूखे की स्थिति पर चर्चा करते हुए यह प्रस्ताव पारित किया गया है.

नयी दिल्ली : माकपा देश के अधिकांश इलाकों में सूखे की स्थिति से निपटने के लिए देशव्यापी आंदोलन कर सरकार पर माकूल दबाव बनायेगी. माकपा की केंद्रीय समिति ने शनिवार को इस आशय का प्रस्ताव पारित कर पार्टी की सभी प्रदेश इकाईयों से सूखा प्रभावित इलाकों में किसान संगठनों को एकजुट कर जनआंदोलन करने को कहा है, जिससे सरकार पर सूखे से निपटने के उपाय एवं राहत कार्य शुरू करने का दबाव बनाया जा सके.

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माकपा महासचिव सीताराम येचुरी की अध्यक्षता में पार्टी की केंद्रीय समिति की तीन दिवसीय बैठक के दौरान पारित प्रस्ताव में देश के अधिकांश इलाके सूखे की चपेट में होने पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा गया है कि पिछले 65 साल में मॉनसून से पहले की अवधि में इस साल सूखे की सबसे भयावह स्थिति उत्पन्न हुई है. केंद्रीय समिति ने प्रस्ताव में कहा कि गुजरात, बिहार, कर्नाटक, झारखंड, और आंध्र प्रदेश सहित तमाम अन्य राज्यों में जलसंकट भी गहरा गया है. इसकी वजह से केन्द्र सरकार को इन राज्यों में सूखे से निपटने के लिये एहतियाती उपाय एवं परामर्श जारी करने पड़े हैं.

माकपा ने गंभीर स्थिति के बावजूद भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार द्वारा सूखा प्रभावित राज्यों को पर्याप्त राहत सहायता देने में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है. लोकसभा चुनाव के परिणाम की राज्यवार समीक्षा के लिए सात से नौ जून तक माकपा की केंद्रीय समिति की बैठक आयोजित की गयी है. पार्टी पोलित ब्यूरो और प्रदेश इकाइयों के पदाधिकारियों की मौजूदगी वाली समिति की बैठक के दूसरे दिन शनिवार को देश में सूखे की स्थिति पर चर्चा करते हुए यह प्रस्ताव पारित किया गया है.

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