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‘Lockdown के बाद की चुनौतियों से निबटने के लिए विपक्ष और विशेषज्ञों की मदद ले सकती है सरकार’

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देश में Coronavirus pandemic के प्रकोप की वजह से Lockdown है, लेकिन इसके खत्म होते ही सरकार के सामने कई सारी चुनौतियां खड़ी हैं. वजह यह है कि इस महामारी के प्रकोप से भारत के आम अवाम को बचाने के लिए लंबे समय तक लॉकडाउन नहीं रखा जा सकता, लेकिन अगर देश की मोदी सरकार चाहे, तो तमाम राजनीतिक सीमाओं को लांघते हुए वह विपक्ष और विशेषज्ञों से मदद ले सकती है. इसका कारण यह है कि वर्ष 2008-09 की वैश्विक आर्थिक महामंदी के दौरान उन लोगों ने देश के आर्थिक हालात को संभाले रखने में अहम भूमिका निभाई थी और तब देश की अर्थव्यवस्था इस स्तर तक नहीं पहुंच पाई थी.

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नयी दिल्ली : रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने देश में कोरोना वायरस महामारी के प्रकोप से बचने के लिए लागू लॉकडाउन के बाद की चुनौतियों से निबटने के लिए सरकार को उपाय बताए हैं. उन्होंने ‘हालिया समय में संभवत: भारत की सबसे बड़ी चुनौती’ नामक एक ब्लॉग में सरकार को सुझाव देते हुए कहा है कि भारत में ऐसे कई लोग हैं, जो सरकार को इससे उबरने में मदद कर सकते हैं. सरकार राजनीतिक विभाजन की लक्ष्मण रेखा को लांघ कर विपक्ष से भी मदद ले सकती है, जिसके पास पिछले वैश्विक वित्तीय संकट से देश को निकालने का अनुभव है.

इसे भी पढ़ें : रघुराम राजन ने सीतारमण पर किया पलटवार, बोले- भाजपा सरकार में RBI गवर्नर के रूप मेरा 26 महीने का रहा कार्यकाल

विपक्षी दल और विशेषज्ञों से मदद ले सकती है सरकार : हालांकि, उन्होंने लिखा है कि आर्थिक लिहाज से भारत आजादी के बाद के सबसे आपातकालीन दौर में है. उन्होंने कहा कि सरकार को इससे निकलने के लिए विपक्षी दलों समेत विशेषज्ञों की मदद लेनी चाहिए. राजन ने कहा कि शायद यह आर्थिक लिहाज से आजादी के बाद की सबसे बड़ी आपात स्थिति है.’ 2008-09 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान मांग में भारी कमी आयी थी, लेकिन तब हमारे कामगार काम पर जा रहे थे, हमारी कंपनियां सालों की ठोस वृद्धि के कारण मजबूत थीं, हमारी वित्तीय प्रणाली बेहतर स्थिति में थी और सरकार के वित्तीय संसाधन भी अच्छे हालात में थे. अभी जब हम कोरोना वायरस महामारी से जूझ रहे हैं, इनमें से कुछ भी सही नहीं हैं.

भारत के पास महामारी से उबरने के साथ ही भविष्य के लिए ठोस बुनियाद करने की है ताकत : उन्होंने कहा कि यदि उचित तरीके तथा प्राथमिकता के साथ काम किया जाए, तो भारत के पास ताकत के इतने स्रोत हैं कि वह कोरोना वायरस महामारी से न सिर्फ उबर सकता है, बल्कि भविष्य के लिए ठोस बुनियाद भी तैयार कर सकता है. राजन ने कहा कि सारे काम प्रधानमंत्री कार्यालय से नियंत्रित होने से ज्यादा फायदा नहीं होगा, क्योंकि वहां लोगों पर काम का बोझ पहले से कहीं अधिक है.

भारत में अनुभवी और क्षमतावान लोगों की नहीं है कमी : उन्होंने कहा कि अभी बहुत कुछ करने की जरूरत है. सरकार को उन लोगों को बुलाना चाहिए, जिनके पास अनुभव और क्षमता है. भारत में ऐसे कई लोग हैं, जो सरकार को इससे उबरने में मदद कर सकते हैं. सरकार राजनीतिक विभाजन की रेखा को लांघ कर विपक्ष से भी मदद ले सकती है, जिसके पास पिछले वैश्विक वित्तीय संकट से देश को निकालने का अनुभव है.

कठोर क्वारेंटीन से कोविड-19 के संक्रमण के प्रसार को रोकने की जरूरत : पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने कहा कि कोविड-19 के प्रकोप से निकलने के लिए हमारी त्वरित प्राथमिकता व्यापक जांच, एक-दूसरे से दूरी तथा कठोर क्वारंटीन (पृथकीकरण) के जरिये संक्रमण के प्रसार की रोकथाम होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि 21 दिनों का लॉकडाउन (बंद) पहला कदम है. इससे हमें बेहतर तैयारी करने का समय मिला है. सरकार हमारे साहसी चिकित्साकर्मियों के सहारे लड़ रही है और जनता, निजी क्षेत्र, रक्षा क्षेत्र, सेवानिवृत्त लोगों समेत हरसंभव संसाधन का इस्तेमाल करने की तैयारी में है. हालांकि, सरकार को गति कई गुणा तेज करने की जरूरत है.

लॉकडाउन के बाद भी वायरस पर काबू नहीं पाया गया, तब क्या किया जाएगा? : राजन ने कहा कि हम लंबे समय तक लॉकडाउन नहीं सह सकते हैं. ऐसे में हमें इस बात पर विचार करना होगा कि किस तरह से संक्रमण को सीमित रखते हुए आर्थिक गतिविधियों को दोबारा शुरू करें. उन्होंने कहा कि भारत को अब इस बारे में भी योजना तैयार करने की जरूरत है कि लॉकडाउन के बाद भी वायरस पर काबू नहीं पाया जा सका, तब क्या किया जाएगा.

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