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ऑनलाइन वित्तीय लेन-देन करते समय हमें बहुत सावधान रहने की है जरूरत

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प्रमंडलीय आयुक्त की अध्यक्षता में साइबर सुरक्षा जागरूकता संबंधी कार्यशाला आयोजित

अनजान व्यक्ति से खाता संबंधी जानकारी, ओटीपी, आधार, पेन, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड नहीं करें शेयर

साइबर ठगी की सूचना दे सकते हैं टॉल फ्री नंबर 1930 या 112 पर

सहरसा.प्रमंडलीय सभागार में आयुक्त कोसी प्रमंडल नीलम चौधरी की अध्यक्षता में सोमवार को कंप्यूटर, सूचना सुरक्षा ग्राहक व जन सामान्य साइबर सुरक्षा जागरूकता संबंधी कार्यशाला का आयोजन किया गया. इस अवसर पर मुख्य प्रबंधक प्रणाली एसबीआई राकेश कुमार झा द्वारा साइबर खतरों व इनसे बचाव के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गयी. वर्तमान में साइबर ठगों द्वारा विभिन्न तरीकों से आर्थिक ठगी करने का प्रयास किया जा रहा है. जिससे बचने की आवश्यकता है. तकनीक की मदद से कई काम बहुत आसान हो गया है. साथ ही इससे गंभीर परिस्थिति भी परिलक्षित हो रही है. जिसमें साइबर फ्रॉड सबसे महत्वपूर्ण है. मुख्य प्रबंधक प्रणाली एसबीआई ने बताया कि ऑनलाइन दुनिया में किसी भी प्रकार के वित्तीय लेनदेन करते समय हमें बहुत सावधान रहने की जरूरत है. डिजिटल ट्रांजेक्शन के दौरान विभिन्न तरीकों से साइबर ठगी को अंजाम दिया जा सकता है. जिससे बचना अतिआवश्यक है. साइबर ठगी का सबसे आसान तरीका लोगों की पहचान चुराना है. इसके लिए साइबर अपराध में संलिप्त ठग द्वारा आधार, पेन कार्ड, बैंक से जुड़ी जानकारी की मांग की जा सकती है. इस निजी जानकारी की मदद से साइबर ठग खाते से अवैध रूप से राशि की निकासी कर लेते हैं. इसलिए किसी भी अनजान व्यक्ति से खाता संबंधी जानकारी, ओटीपी, आधार, पेन, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड शेयर नहीं करना चाहिए. आजकल अक्सर ऐसा देखा जा रहा कि साइबर ठग ऑनलाइन जॉब, लॉटरी, शॉपिंग के नाम पर भी खाता विवरणी संबंधी जानकारी इकट्ठा कर संबंधित व्यक्ति के खाते से राशि की अवैद्य निकासी कर रहे हैं. ऑन लाइन जॉब फ्रॉड से बचने की आवश्यकता है. वित्तीय अपराध में संलिप्त व्यक्ति एटीएम मशीन के साथ भी छेड़छाड़ करके किसी व्यक्ति के कार्ड से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर लेते हैं. जिससे आर्थिक क्षति होने की संभावना रहती है. एटीएम के माध्यम से राशि की निकासी के समय सावधानी बरतने की जरूरत है. किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की स्थिति में तत्काल इसकी सूचना गार्ड को या बैंक प्रबंधन को देना चाहिए. साइबर ठगी का शिकार होने के बाद तीन दिनों के अंदर इसकी सूचना टॉल फ्री नंबर 1930 या 112 पर देना चाहिए. जिससे ससमय साइबर ठग के विरूद्ध उचित कार्रवाई की जा सके. जानकारी दी गयी कि तकनीकी विकास ने आधुनिक जीवन शैली को बदल दिया है. समय के साथ इंटरनेट का प्रयोग आम जीवन में बढ़ता जा रहा है. जिससे कई लाभ भी हैं. साइबर अपराधी नियमित रूप से इंटरनेट पर हमला कर रहे हैं. जिससे छोटी सी चूक साइबर अपराधियों के लिए डेटा चोरी का द्वार खोल सकती है. साइबर अपराध मानवीय भूल के कारण घटित होती है.

साइबर सुरक्षा के लिए जागरूकता जरूरी

साइबर सुरक्षा जागरूकता महत्वपूर्ण है. साइबर अपराध एक ऐसा अपराध है जो कंप्यूटर व नेटवर्क के माध्यम से किया जाता है. इसके तहत निजी जानकारी प्राप्त करना, जानकारी मिटाना, उसका गलत इस्तेमाल करना, फेर बदल करना, ऑनलाइन बैंक खातों से पैसा चुराना सम्मिलित है. साइबर ठगी से बचने के लिए आवश्यक है कि कभी भी अपना पिन नंबर किसी के साथ साझा ना करें. अपना क्रेडिट, डेबिट या एटीएम कार्ड की रसीदों को बैंक, एटीएम या स्टोर में ना छोड़े. ना ही सार्वजनिक स्थान पर फेंके. व्यक्तिगत सूचना जन्मतिथि, जन्म स्थान, पारिवारिक विवरण, पता, फोन नंबर किसी अज्ञात व्यक्ति, संस्था से साझा ना करें. साइबर अपराध के तहत अपराधी ई-मेल, कॉल या एसएमएस के माध्यम से लॉटरी जीतने की सूचना देता है एवं इसके बाद खाता संबंधी विवरणी साझा करने के लिए कहता है. किसी भी परिस्थिति में इस प्रकार के भ्रामक सूचना की स्थिति में अपना व्यक्तिगत सूचना साझा ना करें. साइबर ठग खाता बंद, क्रेडिट या डेबिट कार्ड ब्लॉक होने के संबंध में सूचना देकर खाता संबंधी महत्वपूर्ण विवरण प्राप्त करने की चेष्टा करता है. किसी भी परिस्थिति में खाता संबंधी विवरणी साझा ना करें. स्वयं को नियोजक बताने वाली एवं व्यक्तिगत जानकारी या पैसे के लिए अनुरोध करने वाली फेक कॉल या ई मेल से सावधान रहना चाहिए. इस अवसर पर आयुक्त के सचिव, उप निदेशक कल्याण, उप निदेशक जन संपर्क एवं प्रमंडल के विभिन्न कार्यालय के कर्मी मौजूद थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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