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Inspire Award: योजना से इंस्पायर नहीं हो रहे स्कूल, कैसे मिलेंगे भावी वैज्ञानिक

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Schools are not getting inspired by the scheme

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Inspire Award: नियमानुसार हर स्कूल को पांच आवेदन करना अनिवार्य है, जैविक खेती, टाइप ऑफ स्वाइल, वर्षा जल संरक्षण, सौर ऊर्जा से चलने वाला उपकरण बनाना, सौर मंडल का मॉडल, पारिस्थितिकी तंत्र पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों की जांच करना, मिश्रित खेती सहित अन्य तरह का मॉडल छात्रों द्वारा बनाया जायेगा. इंस्पायर अवार्ड के लिए कक्षा 6 से 10वीं तक के विद्यार्थी पात्र हैं. Other types of models including organic farming, type of soil, rain water conservation, making solar energy powered equipment, model of solar system, examining the effects of climate change on the ecosystem, mixed farming will be made by the students. Students from class 6th to 10th are eligible for the Inspire Award.

Inspire Award: Schools are not getting inspired by the scheme समस्तीपुर : जिला के 154 स्कूलों ने इंस्पायर अवार्ड मानक प्रतियोगिता के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है. इन स्कूलों के 643 छात्रों के इनोवेशन आइडिया को पोर्टल पर अपलोड किया गया है. बता दें कि जिला के किसी भी निजी विद्यालय द्वारा इंस्पायर अवार्ड प्रतियोगिता के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं कराया गया है. दरअसल विज्ञान प्रौद्योगिकी मंत्रालय भारत सरकार द्वारा इंस्पायर अवार्ड मानक प्रतियोगिता में छात्रों द्वारा नवाचारी आइडिया को पहुंचाने के लिए मंच प्रदान किया जाता है. बिहार शिक्षा परियोजना परिषद द्वारा छात्रों को इंस्पायर अवार्ड के लिए रजिस्ट्रेशन कराने के लिए निर्देशित किया गया था. जिसकी अंतिम तिथि 15 अक्टूबर तक निर्धारित थी. डीपीओ सर्व शिक्षा अभियान मानवेंद्र कुमार राय ने बताया कि इंस्पायर अवार्ड मानक प्रतियोगिता के लिए सभी सरकारी और निजी विद्यालयों को आवश्यक दिशा निर्देश दिये गये हैं. जिला के निजी विद्यालयों द्वारा इसमें रुचि नहीं ली गई है. इंस्पायर अवार्ड प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य छात्रों को विज्ञान के क्षेत्र में नई खोज को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है. विज्ञान प्रौद्योगिकी मंत्रालय भारत सरकार से हर साल इंस्पायर अवार्ड प्रतियोगिता आयोजित की जाती है. नयी पीढ़ी को भविष्य का नवाचार इनोवेटर तथा नव प्रवर्तक बनाने के मकसद से केंद्र सरकार द्वारा देशभर में छठवीं से दसवीं के छात्र-छात्राओं के लिए इंस्पायर अवार्ड मानक का आयोजन हर साल किया जाता है. इस साल समस्तीपुर के विद्यार्थियों ने अपनी मजबूत दावेदारी पेश की है. जिन छात्रों का आइडिया केंद्र सरकार द्वारा चुना जायेगा उन्हें 10 हजार रुपये दिये जायेंगे. ताकि बच्चे अपने नवाचारी आइडिया मॉडल को विकसित बना सकें. इंस्पायर अवार्ड के लिए चयनित छात्रों द्वारा अपने मॉडल को ज्यादा विकसित और प्रभावी बनाने के लिए सरकार की ओर से सहयोग के रूप में राशि दी गई है.

Inspire Award: Schools are not getting inspired by the scheme इंस्पायर अवॉर्ड योजना में रुचि नहीं ले रहे विद्यालय

शिक्षा विभाग की ओर से छात्र-छात्राओं को वैज्ञानिक बनाने के लिए चलाई जा रही इंस्पायर अवार्ड योजना में विद्यालय रुचि नहीं ले रहे हैं. जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय से पत्राचार के बावजूद विद्यार्थियों की भागीदारी अपेक्षाकृत बेहतर नहीं है. नियमानुसार हर स्कूल को पांच आवेदन करना अनिवार्य है. कम आवेदन करने पर स्कूल के खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है. जिले में संचालित 898 मध्य विद्यालय एवं 403 माध्यमिक विद्यालय को अनिवार्य रूप से 5-5 इनोवेशन आइडिया अपलोड कराना है. इसका मतलब साफ है कि साइंस टीचर और एचएम कोई रूचि नहीं दिखा रहे है. शहर के आरएसबी इंटर स्कूल के शिक्षक डा. ललित कुमार घोष ने कहा कि बाल प्रतिभाओं की सृजनात्मक व नवाचार सोच को राष्ट्रीय पटल पर पर पहचान देने वाली महती योजना इंस्पायर अवार्ड जिले के स्कूलों के संस्था प्रधानों को इंस्पायर नहीं कर पा रही है. विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार द्वारा संचालित इंस्पायर अवार्ड योजना में निजी व सरकारी स्कूलों के रूचि नहीं लेने से भावी वैज्ञानिक को संबल मिलना असंभव सा नजर आ रहा है. जैविक खेती, टाइप ऑफ स्वाइल, वर्षा जल संरक्षण, सौर ऊर्जा से चलने वाला उपकरण बनाना, सौर मंडल का मॉडल, पारिस्थितिकी तंत्र पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों की जांच करना, मिश्रित खेती सहित अन्य तरह का मॉडल छात्रों द्वारा बनाया जायेगा. इंस्पायर अवार्ड के लिए कक्षा 6 से 10वीं तक के विद्यार्थी पात्र हैं. इस योजना में विद्यार्थियों को अपने यूनिक आइडिया विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग नई दिल्ली को भेजने पड़ते हैं.

Inspire Award: Schools are not getting inspired by the scheme: चयनित विद्यार्थी को विभाग की ओर से 10 हजार रुपए डीबीटी के जरिए मिलते हैं

चयनित विद्यार्थी को विभाग की ओर से 10 हजार रुपए डीबीटी के जरिए मिलते हैं, जिससे वे अपने आइडिया के मॉडल बनाते हैं. इस योजना में जिला स्तर पर चयनित छात्र-छात्रा के मॉडल का प्रदेश स्तर पर प्रदर्शन किया जाता है और चयनित मॉडल का प्रदर्शन राष्ट्रीय स्तर पर होता है. प्रदेश स्तर पर चयनित नवीन एवं मौलिक विचारों के मॉडल को नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन अहमदाबाद द्वारा अपनी लैब में उन्नत तकनीक की मदद उपलब्ध कराकर तैयार कराया जाता है. हर स्कूल से पांच बच्चों का प्रोजेक्ट बनाकर आवेदन कराने के निर्देश थे, लेकिन एकाध स्कूलों को छोड़कर आवेदन करने वाले स्कूलों ने एक, दो और तीन मॉडलों के लिए आवेदन किया है. शिक्षा विभाग के अधिकारियों की अनदेखी के चलते इस महत्वाकांक्षी योजना को पलीता लगाया जा रहा है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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