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मुंबई: रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने अधिकारियों से कहा है कि वे एक दिन के लिए दफ्तर काम बिना अपने सहायकों के करके देखें, इससे उन्हें आम आदमी की दिक्कतों को समझने में मदद मिलेगी और वे बेहतर तरीके से अपने कर्तव्य को पूरा कर सकेंगे.खरी-खरी बोलने के लिए मशहूर गवर्नर ने कहा कि वह रिजर्व बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए इसी तरह की प्रणाली लाना चाहते हैं, जिसके तहत उन्हें कुछ सामान्य बैंकिंग कामकाज करने को कहा जाए, जिससे वे समझ सकें कि अन्य लोगों को इसमें क्या परेशानियां आती हैं.
राजन ने राज्य सचिवालय में अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘वरिष्ठ अधिकारी के रूप में किसी को एक दिन ऐसा काम करना चाहिए जो वे अपने सहायकों से कराते हैं, लेकिन इसमें वे यह नहीं बताएं कि वे कौन हैं.” गवर्नर ने मंत्रालय में वाई बी चव्हाण व्याख्यान में कहा, ‘‘तब संभवत: वे बेहतर तरीके से समझ सकेंगे कि आम आदमी को क्या झेलना पडता है. तब उनके मन में व्यवस्था को बदलने को लेकर अधिक सहानुभूति पैदा हो सकेगी.’
राजन ने कहा कि उनके सहित बहुत से अधिकारी सेवानिवृत्त होने के बाद समझ पाएंगे कि व्यवस्था काफी मुश्किल है. उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद व्यवस्था से मुकाबला करना अधिक कठिन होगा. राजन ने कहा कि वह रिजर्व बैंक में ऐसी व्यवस्था लाना चाहेंगे जहां रिजर्व बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों को मियादी जमा खाते के नोमिनी को बदलने का मामूली काम दिया जाएगा, जिससे वे परेशानियों को समझ सकेंगे.उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार अफसरशाही को अधिक जवाबदेह बनाने के लिए विशेष कदम उठा रही है.
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