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सुर्खियों से परे रह कर भाजपा को जमीन पर उतारने की रही है भूपेंद्र की पहचान

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बिहार भाजपा के प्रभारी सांसद भूपेंद्र यादव को केंद्र में कैबिनेट मंत्री बनाये जाने के पहले से पार्टी उनकी कायल रही है. बिहार भाजपा के पिछले छह सालों से प्रभारी के रूप में उनके कार्य की धमक दिल्ली तक रही. वे बिहार, झारखंड, गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, राजस्थान, तेलंगाना, यूपी और कर्नाटक विधानसभा चुनावों के प्रभारी रहे.

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मिथिलेश,पटना. बिहार भाजपा के प्रभारी सांसद भूपेंद्र यादव को केंद्र में कैबिनेट मंत्री बनाये जाने के पहले से पार्टी उनकी कायल रही है. बिहार भाजपा के पिछले छह सालों से प्रभारी के रूप में उनके कार्य की धमक दिल्ली तक रही. वे बिहार, झारखंड, गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, राजस्थान, तेलंगाना, यूपी और कर्नाटक विधानसभा चुनावों के प्रभारी रहे.

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पिछले साल 2020 के विधानसभा चुनाव के दौरान 74 सीटों पर भाजपा के उम्मीदवारों की जीत के पीछे भूपेंद्र यादव की सधी हुई रणनीति ही काम आयी थी. सहयोगी दलों के साथ सीटों के तालमेल का मुद्दा हो या उम्मीदवारों के चयन का, देर रात तक पार्टी दफ्तर में बैठ रणनीति बनाने की जद्दोजहद एक जोखिम भरा कार्य था.

खास कर जब एक सहयोगी दल लोजपा दूसरे सहयोगी दल जदयू के खिलाफ चुनाव मैदान में उतर गयी हो, लेकिन ऐसी मुश्किल समय में भी सूझबूझ के साथ पार्टी को अपने रास्ते ले चलने की उनकी कुशलता ने जनता के बीच भाजपा के दबदबा को साबित किया. उम्मीदवारों के चयन में जहां सोशल इंजीनियरिंग का ख्याल रखा गया.

वहीं, किसी भी क्षेत्र या समूह को नजरअंदाज नहीं किया गया. इसका प्रतिफल प्रदेश की 74 विधानसभा सीटों पर भाजपा की जीत के रूप में सामने आया. सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता रहे भूपेंद्र यादव ने इसके पहले 2019 के लोकसभा चुनाव में भी अपनी कुशलता दिखायी थी. कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद और उम्मीदवार चयन में हर क्षेत्र का ख्याल रखे जाने के कारण बिहार की चालीस सीटों में एनडीए को 39 सीटें मिलीं.

एकमात्र किशनगंज की सीट कांग्रेस की झोली में जा पायी. गाौरतलब है कि श्री यादव 2015 से बिहार भाजपा के प्रभारी रहे हैं. करीब छह सालों में बिहार का शायद ही कोई हिस्सा रहा हाे, जहां उनकी सभा या कार्यक्रम आयोजित नहीं हुआ हो. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाले भूपेंद्र यादव भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और अप्रैल 2012 के बाद राजस्थान से राज्यसभा के सांसद रहे हैं. वे राज्यसभा के सबसे सक्रिय सदस्यों में से एक रहे हैं.

ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल काॅरेपोरेशन चुनाव के भी रहे प्रभारी

बिहार चुनावों में अपनी पार्टी को जीत दिलाने के बाद श्री यादव ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल काॅरेपोरेशन के चुनाव प्रभारी नियुक्त किये गये. उनके सफल और कुशल योजना से नगरपालिका चुनाव में शानदार और प्रेरणादायक जीत मिली और तेलुगु भाषी राजनीतिक परिदृश्य में भाजपा को मुख्य स्थान पर लाकर खड़ा कर दिया.

श्री यादव 25 संसदीय समितियों के अध्यक्ष व सदस्य रहे हैं. वे अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के 2000 से 2009 तक महासचिव रहे. 2014 से भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव हैं.श्री यादव एक उत्साही पाठक, कॉल्यूमनस्टि हैं जो नियमित रूप से प्रभात खबर समेत देश भर प्रमुख अखबारों में अपने राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और कानूनी अंतरदृष्टि प्रदर्शित करते रहे हैं.

श्री यादव की पहचान सुर्खियों और मीडिया की नजरों में आने से बचते रह कर अपनी सावधानीपूर्वक योजना और रणनीतियों को जमीन पर उतारने की रही है. बहुत कम लोगों को मालूम हो कि कविता और साहित्य में भी उनकी गहरी रुचि रही है. अपने विचार को यात्रा के दौरान कविताओं के माध्यम से कलमबद्ध करते हैं.

श्री यादव अपने कॉलेज के दिनों से पर्यावरण सक्रियता को आगे बढ़ाने के लिए सक्रिय रहे. 2005 में सुप्रीम कोर्ट ऑन फॉरेस्ट कंजर्वेशन नामक पुस्तक के सह-लेखक के रूप में प्रकाशित हुई. वे 9 साल तक कानूनी जागरूकता के लिए अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद से निकलने वाली न्यायपर्व नामक पत्रिका के प्रकाशक भी रहे हैं.

Posted by Ashish Jha

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