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यूपी में एनआरएचएम घोटाले की फिर खुलेंगी परतें, डॉ. वाईएस सचान की मौत मामले में अर्जी सुनेगा सुप्रीम कोर्ट

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एनआरएचएम घोटाले में गोसाईगंज जेल में बंद डॉ. सचान की 22 जून 2011 को संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी. डिप्टी सीएमओ डॉ. वाईएस सचान की 22 जून 2011 को लखनऊ की जिला जेल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की खबर से हड़कंप मच गया था.

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Lucknow News: उत्तर प्रदेश में परिवार कल्याण विभाग के डिप्टी सीएमओ रहे डॉ. वाईएस सचान की लखनऊ जेल में हुई संदिग्ध हालात में मौत का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है. मायावती सरकार के दौरान हुए बहुचर्चित एनआरएचएम (NRHM) घोटाले में डॉ. वाईएस सचान आरोपी थे. इस प्रकरण में 12 साल से न्याय की लड़ाई लड़ रहीं डॉ. सचान की पत्नी मालती सचान सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई हैं.

सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचने पर खुलेगी घोटाले की परत

डॉ. वाईएस सचान की पत्नी ने उत्तर प्रदेश के इस बहुचर्चित मामले में हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. मालती सचान की विशेष अनुमति याचिका को स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सुनने योग्य माना है. इस मामले में जल्द ही सभी विपक्षियों को नोटिस भेजा जाएगा. ऐसे में यूपी की नौकरशाही से लेकर सियासत से जुड़े लोगों के बीच हड़कंप मचना तय माना जा रहा है.

डॉ. सचान की जेल में हुई मौत पर उठे थे सवाल

एनआरएचएम घोटाले में गोसाईगंज जेल में बंद डॉ. सचान की 22 जून 2011 को संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी. डिप्टी सीएमओ डॉ. वाईएस सचान की 22 जून 2011 को लखनऊ की जिला जेल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की खबर से हड़कंप मच गया था. उस वक्त बताया गया था कि डॉक्टर सचान ने जेल की पहली मंजिल में बने एक टॉयलेट में आत्महत्या कर ली है. डॉ. सचान पर बहुचर्चित राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन घोटाले और सीएमओ डॉक्टर बीपी सिंह हत्याकांड मामले का आरोप लगा था.

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डॉ. सचान पहले गबन के आरोप में गिरफ्तार किए गए थे. बाद में पुलिस ने उन पर सीएमओ डॉ. बीपी सिंह और डॉक्टर विनोद आर्य की हत्या के षड्यंत्र में शामिल होने का भी आरोप लगाया था. कहा जाता है कि अपनी मौत के दिन से एक दिन बाद ही डॉ. सचान को अदालत में बयान देना था. चर्चाएं थीं कि वह ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन घोटाले और सीएमओ हत्याकांड मामले में अदालत में कुछ बड़े पर्दाफाश कर सकते थे.

पत्नी की तहरीर पर गोसाईगंज थाने में दर्ज हुई थी एफआईआर

जेल में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई डॉ. सचान की मौत पर गोसाईगंज थाने में 26 जून 2011 को अज्ञात के खिलाफ उनकी पत्नी की तरफ से एक एफआईआर दर्ज कराई गई थी. डॉ. सचान के परिवार वालों ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत से पूर्व की चोटों का हवाला देते हुए इसे हत्या करार दिया था.

सीबीआई को सौंपा गया मामला

इसके बाद 11 जुलाई 2011 को न्यायिक जांच रिपोर्ट में भी डॉ. सचान की मौत को हत्या बताया गया था. लेकिन, बाद में एक जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने 14 जुलाई को मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक डॉ. सचान के आर्टरीज में 8 जगह कट पाए गए थे जो कि 8 से 9 इंच तक गहरे थे. जानकारी के मुताबिक उनके गले पर जो बेल्ट थी उसे मौत के बाद उनके गले से बांधा गया था.

फोरेंसिक जांच में आत्महत्या साबित हुई थी डॉ. सचान की मौत

27 सितंबर 2012 को कई महीनों की जांच पड़ताल के बाद सीबीआई ने अदालत को बताया कि फोरेंसिक जांच में डॉ. सचान की मौत आत्महत्या साबित हुई है. सीबीआई ने हत्या के सबूत नहीं मिलने की बात कही थी. सीबीआई ने कहा कि उसके पास सुबूत हैं कि पूर्व में दो मेडिकल अधिकारियों की मौत में उनकी भूमिका के खुलासे के बाद डॉक्टर सचान इतने दबाव में थे कि उन्होंने खाना लेना भी बंद कर दिया था. इस वजह से पहले डॉ. सचान ने आधे ब्लेड से खुद पर घाव किए, लेकिन उन्हें आशंका थी कि अगर किसी ने उन्हें ऐसी हालत में देख लिया तो उन्हें अस्पताल ले जाया जाएगा. इसलिये डॉक्टर सचान ने फांसी लगा ली थी.

सीबीआई को डॉ. सचान की मौत के बाद एक नोट की फोटोकॉपी मिली थी जिसमें लिखा था कि मैं ये बताना चाहता हूं कि मैं निर्दोष हूं. मुझे जेल प्रशासन के अधिकारियों व बंदियों से तथा मेरे समस्त परिवार से कोई शिकायत नहीं है. सीबीआई के मुताबिक नोट पर लिखावट डॉ. सचान की थी और ऐसा लगता है कि डॉ. सचान ने मीडिया को पत्र लिखने के बाद आत्महत्या कर ली.

जुलाई 2022 में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने माना हत्या और साजिश

अपने पति डॉ. सचान को न्याय दिलाने के लिये उनकी पत्नी मालती ने 27 सितंबर को सीबीआई की रिपोर्ट को चुनौती दी थी. वहीं 9 अगस्त 2017 को सीबीआई ने आत्महत्या बताते हुए अपनी फाइनल रिपोर्ट दाखिल कर दी थी. बाद में 19 नवंबर 2019 को कोर्ट ने सीबीआई को झटका देते हुए उनकी फाइनल रिपोर्ट को खारिज कर दिया था. इसके बाद 12 जुलाई 2022 को सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने इसे हत्या और साजिश माना है.

मालती सचान न्याय के लिए लंबे समय से कोर्ट की शरण में

मामले में न्याय को लेकर डॉ. वाईएस सचान की पत्नी मालती पति की मौत के जिम्मेदारों को सजा दिलाने के लिए भागदौड़ कर रही हैं. मालती सचान के अधिवक्ता रोमिल श्रीवास्तव के मुताबिक डॉ. वाईएएस सचान की मौत की न्यायिक जांच हुई थी. 11 जुलाई 2011 को न्यायिक जांच रिपोर्ट में डॉ. सचान की मौत को हत्या करार दिया गया. मामले की सीबीआई जांच के आदेश हुए. मालती ने सीबीआई की अंतिम रिपोर्ट के जरिये प्रोटेस्ट अर्जी को चुनौती दी थी.

इस प्रकरण में 19 नवंबर 2019 को विशेष अदालत ने इसे खारिज कर मालती की अर्जी को परिवाद के रूप में दर्ज किया था. एक साल पहले 12 जुलाई 2022 सीबीआई की विशेष अदालत ने डॉ. वाईएस सचान की मौत को हत्या व साजिश माना था. इसके बाद तत्कालीन अफसरों को तलब किया. इसके खिलाफ तत्कालीन अफसर हाईकोर्ट चले गए थे. हाईकोर्ट ने अफसरों को तलब करने पर रोक लगाने के साथ ही सीबीआई के आदेश को खारिज कर दिया था. हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ डॉ. सचान की पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है.

सवालों के घेरे में आ गई थी बसपा सरकार

मायावती सरकार में हुई डॉ. सचान की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत को लेकर बसपा सरकार सवालों के घेरे में आ गई थी. लखनऊ से तत्कालीन सांसद लालजी टडंन ने परिवार कल्याण विभाग के उप मुख्य चिकित्साधिकारी वाईएस सचान की लखनऊ जेल में हुई मौत को हत्या बताते हुए इस घटना की उच्च स्तरीय जांच की मांग की थी. उन्होंने कहा था कि दो चिकित्साधिकारियों की मौत के आरोपी डॉ. सचान ने आत्महत्या नहीं की है बल्कि करोड़ों रुपए के दवा घोटाले को जमींदोज करने के लिए उनकी हत्या कर दी गई है.

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