16.1 C
Ranchi
Thursday, February 27, 2025 | 04:21 am
16.1 C
Ranchi

BREAKING NEWS

दिल्ली में 5 फरवरी को मतदान, 8 फरवरी को आएगा रिजल्ट, चुनाव आयोग ने कहा- प्रचार में भाषा का ख्याल रखें

Delhi Assembly Election 2025 Date : दिल्ली में मतदान की तारीखों का ऐलान चुनाव आयोग ने कर दिया है. यहां एक ही चरण में मतदान होंगे.

आसाराम बापू आएंगे जेल से बाहर, नहीं मिल पाएंगे भक्तों से, जानें सुप्रीम कोर्ट ने किस ग्राउंड पर दी जमानत

Asaram Bapu Gets Bail : स्वयंभू संत आसाराम बापू जेल से बाहर आएंगे. सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत दी है.

Oscars 2025: बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप, लेकिन ऑस्कर में हिट हुई कंगुवा, इन 2 फिल्मों को भी नॉमिनेशन में मिली जगह

Oscar 2025: ऑस्कर में जाना हर फिल्म का सपना होता है. ऐसे में कंगुवा, आदुजीविथम और गर्ल्स विल बी गर्ल्स ने बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए ऑस्कर 2025 के नॉमिनेशन में अपनी जगह बना ली है.
Advertisement

प्रेम से परहेज करेंगे तो स्त्री का मन मरेगा, तन उभरेगा

Advertisement

माटी के कवि : पुरबिया उस्ताद ‘महेंदर मिसिर’ की याद में महेंदर मिसिर को भोजपुरी का सबसे रसिया गीतकार माना जाता है. लेकिन, उनके किसी गीत में स्त्री का देह नहीं उभरता. वह स्त्री के लिए जीवन भर रचते रहे. वह अपने समय में प्रेम के विविध आयाम को केंद्रीय विषय बनाकर बंद समाज में […]

Audio Book

ऑडियो सुनें

माटी के कवि : पुरबिया उस्ताद ‘महेंदर मिसिर’ की याद में
महेंदर मिसिर को भोजपुरी का सबसे रसिया गीतकार माना जाता है. लेकिन, उनके किसी गीत में स्त्री का देह नहीं उभरता. वह स्त्री के लिए जीवन भर रचते रहे. वह अपने समय में प्रेम के विविध आयाम को केंद्रीय विषय बनाकर बंद समाज में भविष्य में स्त्री के लिए संभावनाओं के द्वार खोल रहे थे. पढ़िए एक टिप्पणी.
!!निराला बिदेसिया!!
भ्रम और भंवरजाल में फंसे भोजपुरी के एक बड़े पुरोधा महेंदर मिसिर का आज जन्मदिन है. लोग उन्हें पुरबिया उस्ताद कहते हैं. पिछले कुछ साल से उनका नाम फलक पर उभार पा रहा है. रामनाथ पांडेय ने ‘महेंदर मिसिर’ और पांडेय कपिल ने ‘फुलसुंघी’ नाम से उन पर बहुत पहले ही कालजयी उपन्यास लिखे थे, उनके गीत कई दशक से उनके गीत आकाशवाणी से गूंजते रहे हैं, लेकिन इधर कुछ सालों से दूसरी वजहों से चरचे में हैं. एक बड़ी वजह फिल्मी दुनिया की उनमें बढ़ती रुचि है.
करीब आधे दर्जन से अधिक फिल्मकार, निर्माता, निर्देशक, अभिनेता, अभिनेत्री आदि प्रकारांतर से इच्छा जता चुके हैं कि वे पुरबिया उस्ताद पर काम करने की तैयारी में हैं. बड़ी-बड़ी फिल्म निर्माण कंपनियां रुचि ले रही हैं, ऐसी सूचना है. कई ने अभिनेता तक तय कर लिये हैं, करार कर लिये हैं लेकिन बात आगे नहीं बढ़ पा रही. आर्थिक मोरचे पर एक परेशानी है, लेकिन उससे ज्यादा लोचा कहानी को लेकर है. जिंदगी भर प्रेम को ही बदलाव और आजादी का अहम हथियार माननेवाले महेंदर मिसिर को देशभक्त और राष्ट्रवादी रूप में पेश करने की सारी जुगत लगायी जा रही है, लेकिन उनके प्रेम का रूप इतना विराट है कि यह संभव नहीं हो पा रहा.
मजेदार कहें या कि फिर अफसोस की बात कि जो महेंदर मिसिर के ‘कथित जानकार’ हैं या कि भोजपुरीभाषी हैं, वे भी उन्हें राष्ट्रवादी रंग में रंगने में ही उर्जा लगाये हुए हैं. वे प्रकारांतर से यह साबित करना चाहते हैं कि महेंदर मिसिर की मूल पहचान एक सच्चे देशभक्त के रूप में मानी जाये, जो अंगरेजों से लड़ने के लिए नोट छापते थे, देशभक्तों को बांटते थे, गोपीचंद नामक एक जासूस ने उन्हें पकड़वा दिया था. संभव है, यह घटना सच हो, लेकिन इस एक घटना को सच मान कर, इसे ही पहचान की प्रमुख रेखा बनाकर, देशभक्ति और राष्ट्रवादिता की परिधि में बांध कर एक ऐसे सांस्कृतिक नायक को भी सदा-सदा के लिए मारने की तैयारी है, जो सचमुच अपने समय का एक बड़ा नायक था. सामाजिक आजादी का पक्षधर नायक. महेंदर मिसिर को समझने के लिए सबसे कारगर सामग्री उनकी रचनाएं हैं. उनके गीतों की दुनिया है. उनके गीतों में राष्ट्रवादिता और आजादी की लड़ाई की चर्चा कम ही मिलती है. न के बराबर. “हमरा निको नाही लागेगा गोरन के करनी…” जैसे कुछ गीत मुश्किल से मिलते हैं, जबकि महेंदर मिसिर के विशालतम रचना संसार से गुजरने पर 90 प्रतिशत से अधिक गीत प्रेम, भक्ति और जीवन के सौंदर्य के गीत पाते हैं. अपूर्ण रामायण से लेकर राधाकृष्ण के प्रेम-विरह तक के दर्जनों कालजयी गीत, प्रेम के रस से सराबोर दर्जनों पुरबिया गीत, दर्जनों गजल, कई बेमिसाल निरगुण गीत मिलते हैं. अपने अधिकांश गीतों के जरिये महेंदर मिसिर स्त्री को आजाद करने की कोशिश करते हैं. स्त्री के सुख, दुख, खुशी, गम को व्यक्त कर.
महेंदर मिसिर को सबसे रसिया गीतकार माना जाता है भोजपुरी में, लेकिन उनके किसी गीत में स्त्री का देह नहीं उभरता. वह स्त्री के लिए जीवन भर रचते रहे. अगर महेंदर मिसिर के इसी रूप को रहने दे भोजपुरी समाज, तो शायद वह सदैव लोकमानस में जिंदा रहेंगे. महेंदर मिसिर जिस भाषा में रचना कर रहे थे, वह कई मायने में पीढ़ियों से एक बंद समाज रहा है. प्रेम वर्जना का विषय रहा है उस समाज में. कई प्रेम कहानियां दफन होती रही हैं. महेंदर मिसिर अपने समय में प्रेम के विविध आयाम को केंद्रीय विषय बनाकर बंद समाज में भविष्य में स्त्री के लिए संभावनाओं के द्वार खोल रहे थे. वह स्वर देने की कोशिश कर रहे थे कि आज नहीं तो कल स्त्री जब अपनी इच्छा-आकांक्षा व्यक्त करे. प्रेम की दुनिया में विचरे. स्त्री भी प्रेम गीतों के साथ गाये-नाचे. स्त्री अपनी इच्छा-आकांक्षा व्यक्त करेगी, प्रेम का राग गायेगी तो उसके मन का भाव व्यक्त होगा.
उस पर पहरेदारी होगी तो फिर दूसरा उसके तन को उभारेगा. महेंदर मिसिर को राष्ट्रवादिता और देशभक्ति की परिधि में समेट उनकी इस मूल को पहचान को खत्म करने से भोजपुरी समाज का भंवरजाल और बढ़ेगा. भोजपुरी समाज को सहज ही समझना चाहिए कि राष्ट्रवादी लड़ाई और देशभक्ति के लिए उसके पास नायकों की कतार है. महेंदर मिसिर, भिखारी ठाकुर अगर उस कतार में शामिल नहीं भी होंगे तो भी भोजपुरी समाज कोई कम राष्ट्रवादी और देशभक्त समाज नहीं माना जायेगा.
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और संस्कृतिकर्मी हैं.)

ट्रेंडिंग टॉपिक्स

संबंधित ख़बरें

Trending News

Advertisement
Advertisement
Advertisement

Word Of The Day

Sample word
Sample pronunciation
Sample definition
ऐप पर पढें
Home होम Videos वीडियो
News Snaps NewsSnap
News Reels News Reels Your City आप का शहर