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दावोस में विश्व व्यापार मंच से पीएम मोदी के भाषण पर राहुल गांधी का हमला, पूछा यह सवाल

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दावोस में भाषण के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक ट्वीट कर उन पर हमला किया है.राहुलगांधी ने ट्वीट किया है कि प्रिय प्रधानमंत्री, स्विटरलैंडमें आपका स्वागत है, कृपया दावोस को बतायें किएकप्रतिशतभारतीय आबादी के पास 73 प्रतिशत संपत्ति क्यों है. अपने ट्वीट के साथ उन्होंने संदर्भ केकेलिए एक स्टोरीकालिंक […]

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दावोस में भाषण के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक ट्वीट कर उन पर हमला किया है.राहुलगांधी ने ट्वीट किया है कि प्रिय प्रधानमंत्री, स्विटरलैंडमें आपका स्वागत है, कृपया दावोस को बतायें किएकप्रतिशतभारतीय आबादी के पास 73 प्रतिशत संपत्ति क्यों है. अपने ट्वीट के साथ उन्होंने संदर्भ केकेलिए एक स्टोरीकालिंक भी दिया है.

दावोस : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज स्विटरजलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच की 48वीं बैठक को संबाेधित किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में क्लामेट चेंज, आतंकवाद और विश्व के देशों के स्वयं पर केंद्रित होने की प्रवृत्ति को दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया. प्रधानमंत्री ने दावोस के मंच से आतंकवाद के पोषक देशों की भी बिना नाम लिये आलोचना की. इस क्रम में उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिये बिना उसके गुड टेरेरिज्म और बेड टेरेरिज्म के सिद्धांत का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि 21 साल पहले हमारे देश के प्रधानमंत्रीएचडी देवेगौड़ा आये थे और तब से हमारी इकोनॉमी छह गुणा बढ़ गयी है. उन्होंने प्रमुख वैश्विक संस्थाओं में सुधार की जरूरत बतायी. मालूम हो कि सुरक्षा परिषद में भारत लंबे समय से अपनी सदस्यता का दावा करता रहा है, जिसका चीन विरोध करता रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कहा हमने पुराने कानून रद्द कर दिये, लालफीताशाही खत्म कर दी और निवेशकों के लिए लाल कालीन बिछा दी. उन्होंने जीएसटी जैसे सुधारों का उल्लेख किया और पूरे भाषण में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का बार-बार उल्लेख किया.

प्रधानमंत्री मोदी से पहले स्विटरजरलैंड परिसंघ के प्रमुख एलेन बर्सेट ने संबोधित किया.

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तब न गूगल, एमोजन था, न ओसामा और हैरी पाॅटर

प्रधानमंत्री नरेेंद्र मोदी ने कहा कि मुझे इस विश्व आर्थिक मंच की बैठक में शामिल होते हुए प्रसन्नता हो रही है. उन्होंने कहा कि एक महत्वाकांक्षी एजेंडा है. उन्होंने गर्मजोशी से अपने स्वागत के लिए धन्यावाद दिया. मोदी ने कहा भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री देवेगौड़ा 1997 में यहां आये थे और तब हमारी इकोनॉमी 400 बिलियन डॉलर से कुछ अधिक की थी और दो दशक बाद यह लगभग छह गुणा हो गयी है. उन्होंने कहा कि तब गूगल और एमेजोन नहीं था. लोगों ने हैरी पॉटर और ओसामा बिन लादेन का नाम भी नहीं सुना था. वह पिछली शताब्दी थी, आज नयी शताब्दी है.

दुनिया के तीन बड़े खतरे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मानव जाति के लिए तीन बड़े खतरों का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि पहला खतरा क्लाइमेट चेंज का है. उन्होंने कहा कि आज बहुत से द्वीप डूब रहे हैं या डूबने के कगार पर हैं. उन्होंने कहा कि बहुत अधिक गर्मी या बहुत अधिक ठंड इसका परिणाम है. ऐसे में हमें चाहिए कि हम अपने सीमित दायरों से निकल एकजुट हो जायें. हम ईमानदारी से स्वयं से पूछें कि क्या ऐसा कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे कितने देश हैं जो विकासशील देशों को तकनीक देने को तैयार हैं. उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति और संस्कार बार-बार इस बात को दोहराते हैं कि मानव सभ्यता में मनुष्य पृथ्वी की संतान हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व के सामने तीन बड़े खतरों में दूसरा खतरा अातंकवाद को बताया. उन्होंने कहा कि गुड टेरेरिज्म व बैड टेरेरिज्म की अवधारणा गलत है. उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षित युवाओं का अतिवादी बनना बड़ा खतरा है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया के सामने तीसरा खतरा दुनिया के देशों के आत्मकेंद्रन को बताया. उन्होंने कहा कि वे देखते हैं कि दुनिया के ज्यादा से ज्यादा देश स्वयं पर केंद्रित होते जा रहे हैं जो ग्लोबलाइजेशन की अवधारणा के विपरीत है. उन्होंने कहा कि यह आतंकवाद से कम बड़ा खतरा नहीं है और इस कारण ग्लोबलाइजेशन का असर कम होता जा रहा है. उन्होंने कहा कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद बने संगठनों व उनकी कार्य पद्धति आज की वास्तविकताओं को इंगित करते हैं. इनके पुराने मानदंड और विकासमान देशों की जरूरतों के बीच बड़ी खाई दिखती है. अत: इसमें सुधार होना चाहिए.

नयी सदी में डेटा ही संपत्ति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज डेटा संपत्ति है और उसका संग्रह किया जा रहा है और उसका ढेर लगता जा रहा है. यह माना जा रहा है कि जिसके पास जितना डेटा है, वहउतना शक्तिशाली होगा.

साइबरखतरा

प्रधानमंत्री ने साइबर खतरे का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि बहुत सारी चीजों से ऐसी दीवारें खड़ी हो रही हैं. उन्होंने कहा कि यह दीवार विकास के अभाव, बेरोजगारी, गरीबी, संसाधनों पर आधिपत्य के कारण खड़ी हुई है. उन्होंने सवाल उठाया कि हमारी आवश्यकता इन दरारों व दूरियों को बढ़ावा तो नहीं दे रही है. वह कौन-सी शक्तियां हैं जो अलगाव को बढ़ावा देती हैं और सहयोग पर संघर्ष को हावी करती हैं और हमारे पास वे कौन से रास्ते हैं, जिसके जरिये हम इन दरारों व दूरियों को खत्म कर एक सुनहरे भविष्य के सपने को साकार कर सकें.

महात्मा गांधी का बार-बार उल्लेख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 52 मिनट लंबे भाषण में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का बार-बार उल्लेख किया है. उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने आवश्यकता आधारित उपभोग का सिद्धांत दिया था न कि लालच आधारित. हम अपने लालच में यहां तक पहुंच गये. हमें अपने आप से पूछना होगा कि हमारा भला हुआ या बुरा. अगर हम सोचें तो पायेंगे कि पर्यावरण में व्याप्त गड़बड़ियों का समाधान है भारतीय पद्धति को अपनाना. उन्होंने कहा कि योग और अध्यात्म हमें शारीरिक मानसिक स्वास्थ्य दे सकता है और पर्यावरण नुकसान को कम कर सकता है.

वैश्विक संस्थाओं में सुधार जरूरी
प्रधानमंत्रीनरेंद्रमोदी ने अपने भाषण में वैश्विक संस्थाओं में सुधार पर फोकस किया. उन्होंने कहा कि वैश्विक संस्थाओं में सुधार जरूरी है. उन्होंने कहा कि वैश्विक संस्थाओं में सुधार जरूरी है. उन्होंने कहा कि वे नहीं चाहते हैं कि विश्व की खिड़कियां बंद हो. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मैं चाहता हूं कि दुनिया के सभी देशों की हवाएं हमारी खिड़कियों से अंदर आयें, लेकिन इस हवा से हमारे कदम उखड़ जायें यह हमें मंजूर नहीं. उन्होंने कहा कि भारत की विविधता इसके सतत विकास का आधार है.

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